
चैत्र नवरात्रि चौथा दिन कूष्माण्डा देवी की कथा💥Kushmanda Mata ki katha//Adhyatm Sadhana 🚩
चैत्र नवरात्रि चौथा दिन कूष्माण्डा देवी की कथा💥Kushmanda Mata ki katha//Adhyatm Sadhana 🚩 #कूष्माण्डा देवी कथा, #कुष्मांडा माता की कथा, #कुष्मांडा देवी की कथा, #माँ कुष्मांडा की कथा, #माँ कुष्मांडा कथा, मां कूष्मांडा देवी की आरती, #मां कूष्मांडा की कथा, कूष्माण्डा कथा, माँ कूष्माण्डा कथा, आरती देवी कूष्माण्डा जी की, #कूष्माण्डा व्रत कथा, #चौथे नवरात्र की पौराणिक कथा, कुष्मांडा देवी, कुष्मांडा देवी की आरती, कुष्मांडा कथा, मां कुष्मांडा की कथा, #मां कूष्मांडा व्रत कथा, कुष्मांडा माता कथा, #कूष्माण्डा महिमा, #माँ कूष्माण्डा भजन, #देवी कुष्मांडा, जय मां कूष्मांडा मैया, कूष्माण्डा माता आरती, #अध्यात्म साधना, #श्री राम अचल जी महाराज, #श्री अनिरुद्ध आचार्य जी महाराज, मां कूष्मांडा का बीज मंत्र "ऐं ह्रीं देव्यै नम:" है। अन्य महत्वपूर्ण मंत्र: पूजन मंत्र: "ऊँ कूष्माण्डायै नम:" ध्यान मंत्र: "या देवी सर्वभूतेषु मां कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥" स्तुति मंत्र: "सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च। दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदाऽस्तु मे॥" आरती: "कूष्मांडा जय जग सुखदानी। मुझ पर दया करो महारानी॥" कुष्मांडा : मां दुर्गा की चौथी शक्ति की पावन कथा ब्रह्मांड को उत्पन्न करनेवाली मां कुष्मांडा सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च। दधाना हस्तपद्माभ्यां कुष्मांडा शुभदास्तु मे। नवरात्रि में चौथे दिन देवी को कुष्मांडा के रूप में पूजा जाता है। अपनी मंद, हल्की हंसी के द्वारा अण्ड यानी ब्रह्मांड को उत्पन्न करने के कारण इस देवी को कुष्मांडा नाम से अभिहित किया गया है। जब सृष्टि नहीं थी, चारों तरफ अंधकार ही अंधकार था, तब इसी देवी ने अपने ईषत् हास्य से ब्रह्मांड की रचना की थी। इसीलिए इसे सृष्टि की आदिस्वरूपा या आदिशक्ति कहा गया है। इस देवी की आठ भुजाएं हैं, इसलिए अष्टभुजा कहलाईं। इनके सात हाथों में क्रमशः कमण्डल, धनुष, बाण, कमल-पुष्प, अमृतपूर्ण कलश, चक्र तथा गदा हैं। आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को देने वाली जप माला है। इस देवी का वाहन सिंह है और इन्हें कुम्हड़े की बलि प्रिय है। संस्कृति में कुम्हड़े को कुष्मांड कहते हैं इसलिए इस देवी को कुष्मांडा। इस देवी का वास सूर्यमंडल के भीतर लोक में है। सूर्यलोक में रहने की शक्ति क्षमता केवल इन्हीं में है। इसीलिए इनके शरीर की कांति और प्रभा सूर्य की भांति ही दैदीप्यमान है। इनके ही तेज से दसों दिशाएं आलोकित हैं। ब्रह्मांड की सभी वस्तुओं और प्राणियों में इन्हीं का तेज व्याप्त है। अचंचल और पवित्र मन से नवरात्रि के चौथे दिन इस देवी की पूजा-आराधना करना चाहिए। इससे भक्तों के रोगों और शोकों का नाश होता है तथा उसे आयु, यश, बल और आरोग्य प्राप्त होता है। ये देवी अत्यल्प सेवा और भक्ति से ही प्रसन्न होकर आशीर्वाद देती हैं। सच्चे मन से पूजा करने वाले को सुगमता से परम पद प्राप्त होता है। विधि-विधान से पूजा करने पर भक्त को कम समय में ही कृपा का सूक्ष्म भाव अनुभव होने लगता है। ये देवी आधियों-व्याधियों से मुक्त करती हैं और उसे सुख-समृद्धि और उन्नति प्रदान करती हैं। अंततः इस देवी की उपासना में भक्तों को सदैव तत्पर रहना चाहिए। / @spirituallove99 YouTube channel Link 👆 Please Subscribe 🙏 🌹 🚩