आपका शनि किस ग्रह के साथ बैठा है, शुभ अशुभ फलादेश और सबसे तगड़ा उपाय,

आपका शनि किस ग्रह के साथ बैठा है, शुभ अशुभ फलादेश और सबसे तगड़ा उपाय,

www.nakshtratak.com DOWNLOAD OUR APP:- Link is below https://play.google.com/store/apps/de... नक्षत्र तक में आपका स्वागत है, कुंडली परामर्श,कुंडली मिलन,मुहुर्त,रत्न,रुद्राक्ष,पूजा व ग्रह शांति के लिए अप हमसे संपर्क करें, Contact Us:- 7800771770 Our services:-  One question or one problem solution with remedy Rs- 300.  Full kundali consultation with remedy including your 5 questions Rs- 2100.  Full kundali youtube video consultation with remedy including your 5 questions Rs- 7500.  Contact for astrology course Contact Us:- 7800771770, आजकल हमारे विडियो बहुत से लोग कॉपी कर रहे है ऐसे लोगो से सावधान रहें,हमारी तरफ से सिर्फ उन्ही को कॉल जाता है जिनकी अपॉइंटमेंट बुक रहती है या जिनकी पूजा की बुकिंग होती है या स्टोन का आर्डर रहता है, Contact Us:- 7800771770 आपका शनि किस ग्रह के साथ बैठा है, शुभ अशुभ फलादेश और सबसे तगड़ा उपाय, facebook:-   / nakshtratakaditya   facebook page:- https://www.facebook.com/profile.php?... website:- www.nakshtratak.com शनि- सूर्य : शनि -सूर्य के सम्बन्ध को शास्त्र में बहुत ही बुरा मन जाता हे , क्युकी शनि और सूर्य एक दूसरे के खतरनाक शत्रु माने जाते हे। ये युति जातक के जीवन में बहुत ही चढ़ाव उतार लाती हे , शनि सूर्य का सम्बन्ध मतलब संघर्ष, हाहाकार , कष्ट इत्यादि , ऐसे संबंध वाले जातक जीवनभर परिश्रम करते हे। ऐसे जातको को ह्रदय रोग, ब्लडप्रेसर जैसे रोग होते हे। ऐसे जातक को पिता के साथ भी नहीं बनती या तो इनके पिता जीवित नहीं होते। गोचर भ्रमण के दौरान अगर कुंडली के सूर्य परसे शनि का भ्रमण शुरू हो तब पिता के लिए कष्टदायी होता हे। जब सूर्य और शनि कुंडली के एक ही भाव में होते है, तो लोगों को सूर्य से आत्मविश्वास मिलता है और शनि उस विश्वास को खत्म कर देता है। शनि - चंद्र : शनि चंद्र के सम्बन्ध को शास्त्र में विषयुति के नाम से जाना जाता हे। ऐसे जातक मन से बहुत ही निर्बल होते हे। क्युकी चंद्र को ज्योतिष में मन का कारक कहा जाता हे। शनि चंद्र का सम्बन्ध ज्ञानतंतुओं के लिए हानिकारक होता हे , ऐसा सम्बन्ध जातक की मानसिक तकलीफ में बढ़ावा करता हे , मन को निर्बल करता हे , कभी कभी संकटो का पहाड़ खड़ा कर देता हे , लेकिन ऐसे जातक जीवन में पैसा बहुत कमाते हे , और अच्छे पद पर रहकर सुख भोगते हे , लेकिन मन से दुखी होते हे। शनि - मंगल : शनि मंगल की युति भी शत्रु की युति कहलाती हे। अभ्यास की दृष्टि से ये योग टेक्नीकल योग कहलाता हे , इंजीनियर , कोम्प्युटर और अन्य टेक्नीकल लाइन के लिए इस युति का होना शुभ माना जाता हे। लेकिन मंगल सेनापति ग्रह हे। मंगल साहस और निडरता के साथ जुड़ा हुआ ग्रह हे , इसलिए मंगल का शौर्य शनि के दबाव में हो तो मंगला की साहसिकता और साहस का नाश होता हे। ऐसे जातक गुनाखोरी में ज्यादा प्रवृत रहते हे। जातक काफी गुस्सैल और असफल होते हैं।तकनीकी कार्य में जातक सफल हो सकता है।कुंडली में शनि मंगल का योग करियर के लिए संघर्ष देने वाला होता है शनि - बुध : शनि बुध की युति जातक के बुरे रास्ते पे ले जाती हे , इसलिए ऐसे जातक खुदकी शक्ति का उपयोग अच्छे मार्ग पर नहीं कर सकते , बेनंबरी धंधे के लिए ये योग बहुत ही फायदेकारक साबित होता हे , लेकिन कभी कभी कुछ अच्छे योग अगर कुंडली में बन रहे हो तो इस योग का अच्छा भी फल मिलता हे। शनि के गुण जब बुध ग्रहण करता है तो जातक गूढ़ तरीक़े से अध्ययन करता है और अपनी बात को बहुत अच्छे से समझा पाता है। ऐसे में ऐसे व्यक्ति के लाखों चाहने वाले होंगे। शनि - गुरु : शनि गुरु की युति जातक को आध्यात्मवाद की तरफ ले जाती हे , ऐसी युति या प्रतियुति जातक को शिथिल बनाती हे , शनि का मतलब के एकांत, कष्ट , दुःख और गुरु यानी धन कुबेर ,ज्ञान। शनि अगर गुरु के साथ हो तो ऐसे जातक पैसा खर्चने के मामलेमे बहुत ही कंजूस होते हे , उनके हाथ में से जल्दी पैसा नहीं निकलता। अगर किसी की कुंडली में शनि गुरु की युति हो या ये दोनों एक दूसरे को देख रहे हों तो जातक काफी अच्छा सलाहकार होता है। शनि - शुक्र : शनि शुक्र की युति चारित्र्य के लिए हानिकारक होती हे ,ऐसी युति जातक के चारित्र्य को शिथिल बनाती हे , जातक बहुत से व्यसनों की और भागता हे , शुक्र लग्न जीवन का कारक ग्रह हे ,अगर ये युति किसी भी जातक की कुंडली में हे तो लग्न जीवन में तनाव एवं लग्न जीवन नष्ट होने की संभावना होती हे। कभी कभी सेक्सलाइफ में भी विध्नों का सामना करना पड़ता हे। वैसे दोनों मित्र है लेकिन इस युति के कारण शनि शुक्र की ऊर्जा को सोख लेता है। फलस्वरूप जातक यौन सुख में रूचि कम लेता है। शनि - राहु : शनि राहु की युति जिस स्थान में होती हे वो स्थान का बुरा फल मिलता हे , ऐसी युति को श्रापित दोष भी कहा जाता हे , उपरान्त शनि जोभी स्थान का अधिपति होता हे ,उस स्थान का फल अच्छा नहीं देता . इसलिए ऐसा योग अशुभ कहलाता हे। ज्योतिष में यह युति अच्छी नहीं कही गई है लेकिन अक्सर यह देखा गया है कि दोनों शुभ फल देते हैं। दरअसल राहु शनि के समान ही फल करता है इसलिए अगर इस युति में शनि बलवान हो तो जातक को उच्च पद की प्राप्ति होगी और अगर शनि नीच या पीड़ित हुआ तो जातक जीवन भर असफल ही होगा। जिस व्यक्ति की कुंडली में शनि - केतु : शनि केतु की युति जिस स्थान में होती हे वो स्थान का फल भी राहु की तरह मिलता हे, लेकिन जातक अगर आध्यात्मवाद की तरफ आगे जाता हे तो उनको बहुत ही अच्छी पहचान मिलती हे , ऐसी युति से जातक की कुंडलिनी भी जाग्रत हो जाती हे , इस युति में जातक को गंभीर रोग हो सकता है। कैंसर और किसी लाइलाज बीमारी का यह संकेत है। किसी भूत प्रेत की बाधा से भी जातक पीड़ित हो सकता है। जीवन में एक बार ऑपरेशन अवश्य होता है। केतु अगर अशुभ हुआ तो अकाल मौत भी हो जाती है। #nakshatra_tak,नक्षत्र तक ज्योतिष,