
एक मोटा वैष्णव motivational speech,best motivational video #shorts #youtubeshorts #viralshort
motivational video motivational motivational quotes motivational speech motivational video by md motivation motivation best motivational quotes motivational suvichar best motivational video motivational story best motivational video in hindi best student motivational video best motivational videos motivational status video best motivational video for student krishna motivational video motivational thoughts motivational video by krishna एक मोटा वैष्णव गुजरात के एक छोटे से गाँव में एक प्रसिद्ध वैष्णव भक्त रहता था। वह भगवान श्रीकृष्ण का अनन्य भक्त था और हमेशा दूसरों की सेवा में लगा रहता था। लेकिन उसकी एक विशेषता थी—वह बहुत मोटा था। इसलिए लोग उसे प्यार से "मोटा वैष्णव" कहकर पुकारते थे। भक्ति और सेवा मोटा वैष्णव का हृदय दया और करुणा से भरा हुआ था। वह रोज़ाना गरीबों को भोजन कराता, भूखों को खाना खिलाता और ज़रूरतमंदों की मदद करता। उसका मानना था कि असली भक्ति भगवान की मूर्ति के आगे सिर झुकाने में नहीं, बल्कि उसके भक्तों की सेवा करने में है। गाँव के लोग उसकी इस आदत से बहुत प्रभावित थे। वे कहते कि मोटा वैष्णव सिर्फ शरीर से ही मोटा नहीं है, बल्कि उसका दिल भी बहुत बड़ा है। संत का आगमन एक दिन, गाँव में एक प्रसिद्ध संत आए। उन्होंने सुना कि गाँव में एक महान वैष्णव भक्त रहता है, इसलिए वे उससे मिलने पहुँचे। जब उन्होंने मोटा वैष्णव को देखा तो हँसते हुए बोले, "तुम तो बहुत खाते-पीते दिखते हो। सच्चा वैष्णव तो साधना और तपस्या करता है, न कि इतना मोटा होता है!" मोटा वैष्णव ने विनम्रता से उत्तर दिया, "महाराज, मैं सिर्फ अपने लिए नहीं खाता। मैं भगवान के भक्तों की सेवा करता हूँ, और जब तक उनके पेट भरे नहीं होते, मैं खुद भी नहीं खाता।" भगवान की परीक्षा संत को उसकी बात पर विश्वास नहीं हुआ। उन्होंने सोचा कि इसे परखना चाहिए। अगले दिन, संत ने गाँव के कुछ गरीबों को बुलाया और उनसे कहा कि वे मोटा वैष्णव के पास जाकर कहें कि उन्हें बहुत भूख लगी है। जब वे गरीब उसके पास पहुँचे, तो उसने बिना किसी संकोच के अपने घर का सारा भोजन उन्हें दे दिया। खुद भूखा रहकर भी उसने संत और सभी गरीबों की सेवा की। संत यह देखकर चकित रह गए। उन्होंने महसूस किया कि मोटा वैष्णव सच्चे अर्थों में भक्त है, क्योंकि उसकी भक्ति केवल शब्दों में नहीं, बल्कि कर्मों में भी झलकती थी। ईश्वर की कृपा उस रात, संत को स्वप्न में भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन हुए। भगवान ने कहा, "वह मोटा नहीं, बल्कि सबसे बड़ा वैष्णव है। उसकी सेवा-भावना ही उसकी सच्ची भक्ति है।" अगले दिन, संत ने मोटा वैष्णव से क्षमा मांगी और कहा, "तुम्हारी भक्ति सच्ची है। मैं तुम्हें देखकर समझ गया कि असली वैष्णव वही है जो दूसरों की सेवा करता है।" शिक्षा इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि सच्ची भक्ति केवल मंदिरों में बैठकर की जाने वाली पूजा नहीं है, बल्कि दूसरों की सेवा करने में भी है। भगवान केवल उन्हीं भक्तों से प्रसन्न होते हैं जो नि:स्वार्थ भाव से दूसरों की मदद करते हैं। "जिनका हृदय बड़ा होता है, वे ही सच्चे भक्त होते हैं!"