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ट्रिक - ईरानी बिल्ली ने लीन होकर बावले ऊंट के चक्कर लगाए गाँधीजी ने ऐतिहासिक डाण्डी यात्रा प्रारंभ की (12 मार्च, 1930) (5 मार्च, 1931) में गाँधी और इरविन के बीच गाँधी-इरविन समझौता (Gandhi-Irwin Pact) हुआ, जिसके बाद गाँधी ने सविनय अवज्ञा आन्दोलन (Civil Disobedience Movement) वापस ले लिया। इरविन ने खनन और भू-विज्ञान के विकास के लिए इंडियन स्कूल ऑफ़ माइंस, धनबाद (Indian School of Mines Dhanbad) की स्थापना भी की। लॉर्ड विलिंगडन– विलिंगडन के कार्यकाल में द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में गाँधी जी ने कांग्रेस के एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में हिस्सा लिया (1 सितंबर, 1931 से 1 दिसंबर, 1931) और 1932 में तृतीय गोलमेज सम्मेलन तृतीय गोलमेज सम्मेलन का आयोजन (दिसंबर, 1932) विलिंगडन के समय में 1932 में देहरादून में भारतीय सेना अकादमी (Indian Military Academy, IMA) की स्थापना की गयी| ब्रिटेन के प्रधानमंत्री रैम्जे मैकडॉनल ने ऐतिहासिक साम्प्रदायिक निर्णय की घोषणा की (16 अगस्त, 1932) गाँधी जी ने इसके विरोध में आमरण अनशन की घोषणा की (19 सितंबर, 1932) महात्मा गाँधी और अंबेडकर के बीच पूना समझौता (25 सितंबर, 1932) 1934 में गाँधी जी ने दोबारा सविनय अवज्ञा आन्दोलन शुरू किया। 1935 में गवर्नमेंट ऑफ़ इंडिया एक्ट पारित किया गया, एवं 1935 में ही बर्मा को भारत से अलग कर दिया गया। विलिंगडन के समय में ही भारतीय किसान सभा की भी स्थापना की गयी। महात्मा गाँधी एवं अम्बेडकर के बीच 24 सितम्बर, 1932 ई. को पूना समझौता हुआ। भारत सरकार अधिनियम 1935 में पारित हुआ। लॉर्ड लिनलिथगो